Obesity क्या है? कारण, लक्षण, जांच, इलाज और बचाव

Obesity क्या है? (What is Obesity in Hindi)

Obesity यानी मोटापा एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर में जरूरत से ज्यादा चर्बी जमा हो जाती है। यह केवल वजन बढ़ना नहीं, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। Obesity मुख्य रूप से पूरे शरीर, खासकर पेट, हृदय और जोड़ों को प्रभावित करती है।
आज के समय में Obesity बहुत आम हो गई है और यह डायबिटीज, हृदय रोग और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ाती है।


Obesity होने के कारण (Causes of Obesity in Hindi)

Obesity के पीछे कई कारण हो सकते हैं। गलत खानपान और शारीरिक गतिविधि की कमी इसका सबसे बड़ा कारण है। इसके अलावा कुछ मेडिकल और अनुवांशिक कारण भी मोटापे को बढ़ा सकते हैं।

Obesity के मुख्य कारण:

  • अधिक कैलोरी और जंक फूड सेवन (Obesity के कारण)

  • शारीरिक निष्क्रियता और बैठी हुई जीवनशैली

  • ज्यादा मीठा और तला-भुना खाना

  • तनाव और नींद की कमी

  • हार्मोनल असंतुलन

  • अनुवांशिक / पारिवारिक इतिहास


Obesity के लक्षण (Symptoms of Obesity in Hindi)

Obesity के लक्षण धीरे-धीरे दिखाई देते हैं। शुरुआत में सिर्फ वजन बढ़ता है, लेकिन समय के साथ कई शारीरिक समस्याएं जुड़ जाती हैं।

Obesity के लक्षण आमतौर पर:

  • शुरुआती लक्षण: वजन तेजी से बढ़ना, जल्दी थकान

  • सामान्य लक्षण: सांस फूलना, अधिक पसीना

  • गंभीर लक्षण: जोड़ों में दर्द, डायबिटीज, हाई BP


Obesity की जांच कैसे होती है? (Diagnosis of Obesity in Hindi)

Obesity की जांच वजन और लंबाई के अनुपात से की जाती है। सही जांच से मोटापे की गंभीरता का पता चलता है।

डॉक्टर निम्न जांच कर सकते हैं:

  • BMI (Body Mass Index) जांच

  • शारीरिक परीक्षण

  • ब्लड टेस्ट (शुगर, कोलेस्ट्रॉल)

  • हार्मोनल जांच (यदि आवश्यक हो)


Obesity से बचाव (Prevention Tips of Obesity in Hindi)

Obesity से बचाव के लिए जीवनशैली में सुधार सबसे जरूरी है। सही आदतें अपनाकर मोटापे को रोका जा सकता है।

Obesity से बचाव के उपाय:

  • संतुलित और पौष्टिक आहार

  • रोजाना व्यायाम और सक्रिय जीवनशैली

  • जंक फूड और मीठे से दूरी

  • पर्याप्त नींद

  • नियमित वजन और स्वास्थ्य जांच


Obesity का इलाज (Treatment of Obesity in Hindi)

Obesity का इलाज उसकी गंभीरता पर निर्भर करता है। अधिकतर मामलों में जीवनशैली बदलाव से ही सुधार संभव है।

Obesity का इलाज:

  • डाइट प्लान और पोषण सलाह

  • नियमित व्यायाम

  • दवाइयों द्वारा इलाज (यदि जरूरी हो)

  • सर्जरी / बैरियाट्रिक सर्जरी (गंभीर मामलों में)

Also Read : Diabetes Mellitus क्या है कारण, लक्षण, जांच, इलाज और बचाव


कब डॉक्टर से संपर्क करें? (Consult With Our Doctor)

यदि वजन लगातार बढ़ रहा हो या मोटापे के कारण अन्य बीमारियां शुरू हो गई हों, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें यदि:

  • वजन तेजी से बढ़ता जाए

  • सांस फूलने या जोड़ों में दर्द हो

  • डायबिटीज या BP बढ़ने लगे

  • घरेलू उपाय असर न करें

📞 हमारे अनुभवी डॉक्टर से आज ही संपर्क करें और सही इलाज पाएं।

Dr. Vipul Bhatt
B.A.M.S. (HAMC), D.N.I. (NIA, Jaipur)
Chief physician-Sandhanama Ayurveda.Dehradun U.K
Ex. Consultant: T. Ayurveda, Changchun, China,
Ex. Consultant : Dongshan ayurveda, Hainan, China

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs of Obesity)

Q1. Obesity क्या एक बीमारी है?
हाँ, Obesity को एक गंभीर बीमारी माना जाता है।

Q2. क्या Obesity पूरी तरह ठीक हो सकती है?
सही डाइट और जीवनशैली से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

Q3. क्या बच्चों में भी Obesity हो सकती है?
हाँ, गलत खानपान और मोबाइल जीवनशैली के कारण बच्चों में भी Obesity बढ़ रही है।

Q4. तेजी से वजन बढ़ना किसका लक्षण है?
ऊतकों में तरल पदार्थ जमा होने के कारण होने वाली सूजन या पेट फूलना वजन बढ़ने का कारण बन सकता है। यह मासिक धर्म, हृदय या गुर्दे की विफलता, प्रीक्लेम्पसिया या आपके द्वारा ली जा रही दवाओं के कारण हो सकता है। तेजी से वजन बढ़ना खतरनाक द्रव प्रतिधारण का संकेत हो सकता है। यदि आप धूम्रपान छोड़ देते हैं, तो आपका वजन बढ़ सकता है।

Q5. कितना वजन बढ़ना असामान्य माना जाता है?
यदि आपका वजन प्रतिदिन 2 से 3 पाउंड या प्रति सप्ताह 5 पाउंड बढ़ जाता है, तो आपको डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। यदि एक महीने में आपके शरीर के वजन का 5% या उससे अधिक वजन बढ़ जाता है, तो भी डॉक्टर से परामर्श लेना महत्वपूर्ण है। इस प्रकार का अप्रत्याशित वजन बढ़ना किसी अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है।


Disclaimer (अस्वीकरण)

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी इलाज या डाइट प्लान को शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें

Diabetes Mellitus क्या है कारण, लक्षण, जांच, इलाज और बचाव

Diabetes Mellitus क्या है? (What is Diabetes Mellitus in Hindi)

Diabetes Mellitus एक चयापचय (Metabolic) रोग है, जिसमें शरीर में रक्त शर्करा (Blood Sugar) का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है। यह समस्या तब होती है जब शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बनाता या इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पाता।
Diabetes Mellitus मुख्य रूप से अग्न्याशय (Pancreas) और पूरे शरीर की कोशिकाओं को प्रभावित करता है। यह एक बहुत आम बीमारी है और भारत में करोड़ों लोग Diabetes Mellitus से पीड़ित हैं।


Diabetes Mellitus होने के कारण (Causes of Diabetes Mellitus in Hindi)

Diabetes Mellitus के कारण शरीर में इंसुलिन की कमी या उसका सही तरह से काम न करना होता है। गलत जीवनशैली और अनुवांशिक कारण इस बीमारी के खतरे को बढ़ा देते हैं। लंबे समय तक अनियंत्रित रहने पर यह गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती है।

Diabetes Mellitus के मुख्य कारण:

  • इंसुलिन का कम बनना (Diabetes Mellitus के कारण)

  • मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता

  • अधिक मीठा और जंक फूड सेवन

  • पारिवारिक / अनुवांशिक इतिहास

  • तनाव और हार्मोनल असंतुलन

  • गर्भावस्था में डायबिटीज (Gestational Diabetes)


Diabetes Mellitus के लक्षण (Symptoms of Diabetes Mellitus in Hindi)

Diabetes Mellitus के लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं। कई बार शुरुआत में लक्षण हल्के होते हैं, जिससे बीमारी पहचान में नहीं आती। समय के साथ लक्षण गंभीर हो सकते हैं।

Diabetes Mellitus के लक्षण आमतौर पर:

  • शुरुआती लक्षण: बार-बार प्यास लगना, थकान

  • सामान्य लक्षण: बार-बार पेशाब आना, वजन घटना

  • गंभीर लक्षण: नजर धुंधली होना, घाव देर से भरना, हाथ-पैर सुन्न होना


Diabetes Mellitus की जांच कैसे होती है? (Diagnosis of Diabetes Mellitus in Hindi)

Diabetes Mellitus की जांच ब्लड शुगर टेस्ट द्वारा की जाती है। समय पर जांच से बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है और जटिलताओं से बचाव संभव है।

डॉक्टर निम्न जांच कर सकते हैं:

  • फास्टिंग ब्लड शुगर टेस्ट

  • पोस्ट प्रांडियल ब्लड शुगर टेस्ट

  • HbA1c टेस्ट

  • यूरिन टेस्ट

  • अन्य आवश्यक मेडिकल जांच


Diabetes Mellitus से बचाव (Prevention Tips of Diabetes Mellitus in Hindi)

Diabetes Mellitus से बचाव के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी है। सही खान-पान और नियमित गतिविधि से इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

Diabetes Mellitus से बचाव के उपाय:

  • संतुलित और कम शुगर वाला आहार

  • नियमित व्यायाम और वजन नियंत्रण

  • तनाव कम करना

  • धूम्रपान और शराब से दूरी

  • समय-समय पर ब्लड शुगर जांच


Diabetes Mellitus का इलाज (Treatment of Diabetes Mellitus in Hindi)

Diabetes Mellitus का इलाज मरीज की स्थिति और डायबिटीज के प्रकार पर निर्भर करता है। सही इलाज से ब्लड शुगर को नियंत्रित रखा जा सकता है।

Diabetes Mellitus का इलाज:

  • दवाइयों द्वारा इलाज

  • इंसुलिन थेरेपी (यदि आवश्यक हो)

  • लाइफस्टाइल बदलाव

  • डाइट कंट्रोल और नियमित मॉनिटरिंग

Also Read : Heart Disease, CAD क्या है? कारण, लक्षण, जांच, इलाज और बचाव


कब डॉक्टर से संपर्क करें? (Consult With Our Doctor)

यदि आपको Diabetes Mellitus के लक्षण दिखाई दें या ब्लड शुगर लगातार बढ़ी हुई आए, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज गंभीर जटिलताओं से बचाता है।

तुरंत डॉक्टर से सलाह लें यदि:

  • बार-बार प्यास और पेशाब आए

  • वजन तेजी से घटे

  • थकान या कमजोरी बनी रहे

  • घरेलू उपाय असर न करें

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Dr. Vipul Bhatt
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs of Diabetes Mellitus)

Q1. Diabetes Mellitus क्या पूरी तरह ठीक हो सकता है?
नहीं, लेकिन सही इलाज और जीवनशैली से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

Q2. क्या Diabetes केवल मीठा खाने से होती है?
नहीं, इसके कई कारण होते हैं जैसे मोटापा, अनुवांशिकता और जीवनशैली।

Q3. क्या युवा लोगों को भी Diabetes Mellitus हो सकती है?
हाँ, आजकल गलत जीवनशैली के कारण युवाओं में भी यह बीमारी बढ़ रही है।

Q4. डायबिटीज मेलिटस क्या नहीं खाना चाहिए?
सफेद ब्रेड, पास्ता और मीठे अनाज आपके शरीर में ब्लड शुगर की मात्रा को बढ़ाते हैं। मीठे पेय पदार्थ: कुछ लोगों को सोडा, फलों के रस और एनर्जी ड्रिंक पीने की आदत होती है। लेकिन यह ब्लड शुगर के साथ-साथ एम्पटी कैलोरी को भी बढ़ाता है।

Q5. डायबिटीज सबसे पहले क्या नुकसान पहुंचाती है?
हृदय संबंधी जटिलताएं: टाइप 1 मधुमेह वाले व्यक्तियों में हृदय रोग विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है, जिसमें कोरोनरी धमनी रोग, दिल का दौरा और स्ट्रोक शामिल हैं। नेफ्रोपैथी (गुर्दे की क्षति): क्रोनिक हाई ब्लड शुगर समय के साथ गुर्दे को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे डायबिटिक नेफ्रोपैथी हो सकती है।


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यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी जांच या इलाज से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें

Heart Disease, CAD क्या है? कारण, लक्षण, जांच, इलाज और बचाव

Heart Disease, CAD क्या है? (What is Heart Disease / CAD in Hindi)

Heart Disease एक सामान्य शब्द है, जिसमें दिल से जुड़ी कई बीमारियां शामिल होती हैं। इनमें सबसे आम है CAD (Coronary Artery Disease)। CAD वह स्थिति है जिसमें दिल की धमनियों में वसा (प्लाक) जम जाती है, जिससे रक्त प्रवाह कम हो जाता है।
Heart disease, CAD मुख्य रूप से हृदय की धमनियों को प्रभावित करती है और आज यह दुनिया भर में मौत के प्रमुख कारणों में से एक है।


Heart Disease, CAD होने के कारण (Causes of Heart Disease, CAD in Hindi)

Heart disease और CAD धीरे-धीरे विकसित होने वाली बीमारियां हैं। गलत जीवनशैली और कुछ मेडिकल स्थितियां इनका जोखिम बढ़ा देती हैं। लंबे समय तक अनदेखा करने पर यह हार्ट अटैक का कारण बन सकती हैं।

Heart disease, CAD के मुख्य कारण:

  • धमनियों में चर्बी जमना (Heart disease के कारण)

  • उच्च रक्तचाप (Hypertension)

  • उच्च कोलेस्ट्रॉल

  • धूम्रपान और शराब सेवन

  • मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता

  • अनुवांशिक / पारिवारिक हृदय रोग

  • मधुमेह (Diabetes)


Heart Disease, CAD के लक्षण (Symptoms of Heart Disease, CAD in Hindi)

Heart disease, CAD के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। शुरुआत में हल्के संकेत दिखाई देते हैं, लेकिन गंभीर अवस्था में स्थिति जानलेवा हो सकती है।

Heart disease, CAD के लक्षण आमतौर पर:

  • शुरुआती लक्षण: थकान, हल्का सीने में भारीपन

  • सामान्य लक्षण: सीने में दर्द, सांस फूलना, पसीना आना

  • गंभीर लक्षण: तेज सीने का दर्द, बाएं हाथ या जबड़े में दर्द, बेहोशी


Heart Disease, CAD की जांच कैसे होती है? (Diagnosis of Heart Disease, CAD in Hindi)

Heart disease और CAD की समय पर जांच बेहद जरूरी है। सही जांच से बीमारी की गंभीरता का पता लगाया जाता है और इलाज की योजना बनती है।

डॉक्टर निम्न जांच कर सकते हैं:

  • शारीरिक परीक्षण और BP जांच

  • ECG (इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम)

  • ECHO (2D Echo)

  • ब्लड टेस्ट (कोलेस्ट्रॉल, शुगर)

  • TMT, CT Angiography या Coronary Angiography


Heart Disease, CAD से बचाव (Prevention Tips of Heart Disease, CAD in Hindi)

Heart disease, CAD से बचाव संभव है यदि समय रहते सही कदम उठाए जाएं। स्वस्थ जीवनशैली सबसे बड़ा बचाव है।

Heart disease, CAD से बचाव के उपाय:

  • कम वसा और कम नमक वाला आहार

  • नियमित व्यायाम और योग

  • धूम्रपान व शराब से दूरी

  • वजन और BP नियंत्रण

  • नियमित हार्ट चेक-अप


Heart Disease, CAD का इलाज (Treatment of Heart Disease, CAD in Hindi)

Heart disease, CAD का इलाज इसकी गंभीरता पर निर्भर करता है। शुरुआती अवस्था में दवाइयों से नियंत्रण संभव है, जबकि गंभीर मामलों में सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।

Heart disease, CAD का इलाज:

  • दवाइयों द्वारा इलाज (ब्लड थिनर, कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल)

  • लाइफस्टाइल बदलाव

  • एंजियोप्लास्टी / स्टेंट

  • बायपास सर्जरी (यदि आवश्यक हो)

Also Read : Hypertension क्या है? कारण, लक्षण, जांच, इलाज और बचाव


कब डॉक्टर से संपर्क करें? (Consult With Our Doctor)

यदि आपको Heart disease या CAD के लक्षण महसूस हों, तो देर न करें। समय पर इलाज जान बचा सकता है।

तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें यदि:

  • सीने में बार-बार दर्द हो

  • सांस लेने में परेशानी बढ़े

  • थकान या चक्कर लगातार बने रहें

  • पारिवारिक इतिहास मौजूद हो

📞 हमारे अनुभवी डॉक्टर से आज ही संपर्क करें और सही इलाज पाएं।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs of Heart Disease, CAD)

Q1. CAD और हार्ट अटैक में क्या अंतर है?
CAD धमनियों की बीमारी है, जबकि हार्ट अटैक इसका गंभीर परिणाम हो सकता है।

Q2. क्या Heart disease पूरी तरह ठीक हो सकती है?
पूरी तरह नहीं, लेकिन सही इलाज से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

Q3. क्या युवाओं को भी CAD हो सकती है?
हाँ, गलत जीवनशैली के कारण युवाओं में भी CAD के मामले बढ़ रहे हैं।

Q2. हृदय रोग के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
हार्ट डिजीज के शुरुआती लक्षणों में सीने में दर्द या बेचैनी, सांस फूलना, चक्कर आना, अचानक थकान, पसीना आना, और हाथ, गर्दन, जबड़े या पीठ में दर्द शामिल हैं; मतली, उल्टी या पेट खराब होना भी संकेत हो सकते हैं, खासकर महिलाओं में, और इन्हें नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए क्योंकि ये हृदय संबंधी समस्याओं के सूक्ष्म संकेत हो सकते हैं, जिसके लिए डॉक्टर से तुरंत सलाह लेना ज़रूरी है।  

Q3. कैसे पता करें कि दिल कमजोर है?
कमजोर दिल के लक्षणों में थकान, सांस फूलना, सीने में दर्द या भारीपन, चक्कर आना, पैरों में सूजन, तेज या अनियमित धड़कन, खांसी (खासकर रात में), मतली, और रात में बार-बार पेशाब आना शामिल हैं, जो खराब रक्त संचार और शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन की कमी के कारण होते हैं; इनमें से कोई भी लक्षण महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाना महत्वपूर्ण है


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यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी जांच या इलाज से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें

Hypertension क्या है? कारण, लक्षण, जांच, इलाज और बचाव

Hypertension क्या है? (What is Hypertension in Hindi)

Hypertension, जिसे हिंदी में उच्च रक्तचाप कहा जाता है, एक ऐसी स्थिति है जिसमें धमनियों में बहने वाले खून का दबाव सामान्य से अधिक हो जाता है। यह समस्या मुख्य रूप से हृदय, दिमाग, किडनी और आंखों को प्रभावित करती है।
Hypertension एक आम लेकिन गंभीर बीमारी है, जो अक्सर बिना लक्षणों के होती है। भारत में बड़ी संख्या में लोग Hypertension से पीड़ित हैं, इसलिए इसे “Silent Killer” भी कहा जाता है।


Hypertension होने के कारण (Causes of Hypertension in Hindi)

Hypertension कई कारणों से हो सकता है। यह समस्या जीवनशैली और मेडिकल कारणों दोनों से जुड़ी होती है। गलत खानपान, तनाव और शारीरिक निष्क्रियता Hypertension के खतरे को बढ़ा देती है। लंबे समय तक अनियंत्रित रहने पर यह गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है।

Hypertension के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • अधिक नमक का सेवन (Hypertension के कारण में प्रमुख)

  • मोटापा और शारीरिक गतिविधि की कमी

  • मानसिक तनाव और चिंता

  • धूम्रपान और शराब का सेवन

  • अनुवांशिक / पारिवारिक इतिहास

  • मधुमेह, किडनी रोग, हार्मोनल समस्याएं


Hypertension के लक्षण (Symptoms of Hypertension in Hindi)

Hypertension के लक्षण शुरू में स्पष्ट नहीं होते। कई लोगों को वर्षों तक पता ही नहीं चलता कि वे इस बीमारी से ग्रस्त हैं। जब रक्तचाप बहुत अधिक बढ़ जाता है, तब कुछ शारीरिक संकेत दिखाई देने लगते हैं।

Hypertension के लक्षण आमतौर पर ये हो सकते हैं:

  • शुरुआती लक्षण: हल्का सिरदर्द, थकान

  • सामान्य लक्षण: चक्कर आना, घबराहट, धड़कन तेज होना

  • गंभीर लक्षण: सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, नजर धुंधली होना


Hypertension की जांच कैसे होती है? (Diagnosis of Hypertension in Hindi)

Hypertension की जांच आसान लेकिन बेहद जरूरी होती है। नियमित जांच से इस बीमारी को समय रहते नियंत्रित किया जा सकता है। डॉक्टर कई बार अलग-अलग दिनों में ब्लड प्रेशर मापकर इसकी पुष्टि करते हैं।

Hypertension की जांच के लिए डॉक्टर ये टेस्ट कर सकते हैं:

  • शारीरिक परीक्षण (BP Measurement)

  • ब्लड टेस्ट और यूरिन टेस्ट

  • ECG, ECHO

  • किडनी और हृदय से संबंधित जांच


Hypertension से बचाव (Prevention Tips of Hypertension in Hindi)

Hypertension से बचाव संभव है, यदि सही जीवनशैली अपनाई जाए। छोटे-छोटे बदलाव इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं। नियमित जांच और संतुलित दिनचर्या बहुत जरूरी है।

Hypertension से बचाव के उपाय:

  • कम नमक और संतुलित आहार

  • रोजाना व्यायाम और योग

  • तनाव कम करना

  • धूम्रपान और शराब से दूरी

  • समय-समय पर BP जांच


Hypertension का इलाज (Treatment of Hypertension in Hindi)

Hypertension का इलाज इसकी गंभीरता और मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है। अधिकतर मामलों में सही दवाइयों और जीवनशैली सुधार से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

Hypertension का इलाज निम्न तरीकों से किया जाता है:

  • दवाइयों द्वारा इलाज (BP control medicines)

  • लाइफस्टाइल बदलाव (डाइट, एक्सरसाइज)

  • गंभीर मामलों में विशेष थेरेपी

Also Read : Bronchitis क्या है? कारण, लक्षण, जांच, इलाज और बचाव


कब डॉक्टर से संपर्क करें? (Consult With Our Doctor)

यदि Hypertension के लक्षण लंबे समय तक बने रहें या BP लगातार बढ़ा हुआ आए, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज से हृदयाघात, स्ट्रोक और किडनी फेल होने का खतरा कम किया जा सकता है।

तुरंत डॉक्टर से सलाह लें यदि:

  • लक्षण लंबे समय तक बने रहें

  • सिरदर्द या सीने में दर्द बढ़ता जाए

  • घरेलू उपाय काम न करें

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs of Hypertension)

Q1. Hypertension क्या पूरी तरह ठीक हो सकता है?
नहीं, लेकिन सही इलाज और जीवनशैली से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

Q2. Hypertension में क्या खाना चाहिए?
कम नमक, फल, सब्जियां और फाइबर युक्त भोजन लेना चाहिए।

Q3. क्या युवा लोगों को भी Hypertension हो सकता है?
हाँ, खराब जीवनशैली के कारण आजकल युवाओं में भी Hypertension बढ़ रहा है।

Q4. हाइपोटेंशन के कारण क्या होता है?
ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन, जिसे पोस्टुरल हाइपोटेंशन भी कहा जाता है । यह बैठने या लेटने के बाद खड़े होने पर रक्तचाप में अचानक गिरावट है। इसके कारणों में निर्जलीकरण, लंबे समय तक बिस्तर पर आराम, गर्भावस्था, कुछ चिकित्सीय स्थितियाँ और कुछ दवाएँ शामिल हैं। इस प्रकार का निम्न रक्तचाप वृद्ध वयस्कों में

Q5. हाइपोटेंशन कब इमरजेंसी है?
यदि आपको अत्यधिक निम्न रक्तचाप या सदमे के लक्षण हैं , तो 911 या अपने स्थानीय आपातकालीन नंबर पर कॉल करें। अधिकांश स्वास्थ्य पेशेवर रक्तचाप को तभी कम मानते हैं जब इससे लक्षण दिखाई देते हैं। समय-समय पर हल्का चक्कर आना या सिर हल्का महसूस होना कई कारणों से हो सकता है।


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Asthma क्या है? कारण, लक्षण, जांच, इलाज और बचाव

Asthma क्या है? (What is Asthma in Hindi)

Asthma (दमा) एक पुरानी श्वसन बीमारी है, जिसमें सांस की नलियां (Airways) सूज जाती हैं और संकरी हो जाती हैं। इससे सांस लेने में दिक्कत, सीटी जैसी आवाज और खांसी होती है। Asthma फेफड़ों को प्रभावित करता है और बच्चों व बड़ों दोनों में पाया जाता है। आज के समय में Asthma काफी आम बीमारी बन चुकी है, जिसे सही देखभाल से नियंत्रित किया जा सकता है।


Asthma होने के कारण (Causes of Asthma in Hindi)

Asthma के कारण ज्यादातर एलर्जी, पर्यावरण और अनुवांशिक कारकों से जुड़े होते हैं। कुछ लोगों में यह बचपन से होता है, जबकि कुछ में बाद में विकसित होता है।

Asthma के मुख्य कारण:

  • एलर्जी और धूल-मिट्टी (Asthma के कारण)

  • धुआं, प्रदूषण और सिगरेट

  • ठंडी हवा और संक्रमण

  • अनुवांशिक / इम्यून सिस्टम की कमजोरी


Asthma के लक्षण (Symptoms of Asthma in Hindi)

Asthma के लक्षण समय-समय पर बढ़ते और घटते रहते हैं। कई बार रात या सुबह के समय परेशानी ज्यादा होती है।

आमतौर पर दिखने वाले लक्षण:

  • शुरुआती लक्षण: हल्की सांस फूलना, खांसी

  • सामान्य लक्षण: सीने में जकड़न, सीटी जैसी आवाज

  • गंभीर अवस्था: तेज सांस फूलना, बोलने में कठिनाई


Asthma की जांच कैसे होती है? (Diagnosis of Asthma in Hindi)

Asthma की जांच डॉक्टर मरीज के लक्षणों और कुछ विशेष टेस्ट के आधार पर करते हैं, ताकि बीमारी की पुष्टि हो सके।

जांच के तरीके:

  • शारीरिक परीक्षण

  • स्पाइरोमेट्री (फेफड़ों की जांच)

  • एलर्जी टेस्ट

  • एक्स-रे या अन्य आवश्यक जांच


Asthma से बचाव (Prevention Tips of Asthma in Hindi)

Asthma से बचाव के लिए ट्रिगर फैक्टर्स से दूर रहना सबसे जरूरी है। सही जीवनशैली से अटैक की संभावना कम की जा सकती है।

बचाव के उपाय:

  • धूल, धुआं और प्रदूषण से बचाव

  • नियमित व्यायाम और प्राणायाम

  • एलर्जी पैदा करने वाली चीजों से दूरी

  • समय-समय पर डॉक्टर की जांच


Asthma का इलाज (Treatment of Asthma in Hindi)

Asthma का इलाज पूरी तरह खत्म नहीं करता, लेकिन इसे प्रभावी रूप से नियंत्रित करता है। सही दवाइयों से मरीज सामान्य जीवन जी सकता है।

इलाज के विकल्प:

  • इनहेलर और दवाइयाँ

  • लाइफस्टाइल बदलाव

  • एलर्जी कंट्रोल थेरेपी

  • गंभीर मामलों में विशेष उपचार

Also Read : Cold and Cough क्या है? कारण, लक्षण, जांच, इलाज और बचाव


कब डॉक्टर से संपर्क करें? (Consult With Our Doctor)

अगर Asthma के लक्षण बार-बार हों या सांस लेने में ज्यादा परेशानी हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

डॉक्टर से संपर्क करें जब:

  • सांस फूलना बढ़ता जाए

  • दवाइयों से आराम न मिले

  • रात में बार-बार अटैक आए

📞 हमारे अनुभवी डॉक्टर से आज ही संपर्क करें और सही इलाज पाएं।

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Chief physician-Sandhanam Ayurveda.Dehradun U.K
Ex. Consultant: T. Ayurveda, Changchun, China,
Ex. Consultant : Dongshan ayurveda, Hainan, China

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs of Asthma)

Q1. क्या Asthma पूरी तरह ठीक हो सकता है?
Asthma पूरी तरह ठीक नहीं होता, लेकिन नियंत्रित किया जा सकता है।

Q2. Asthma अटैक क्यों आता है?
एलर्जी, धूल, धुआं और ठंडी हवा से अटैक आ सकता है।

Q3. Asthma में इनहेलर सुरक्षित है?
हाँ, डॉक्टर की सलाह से लिया गया इनहेलर सुरक्षित और प्रभावी होता है।

Q4. मुझे कैसे पता चलेगा कि मुझे अस्थमा है?
अस्थमा का पता लक्षणों (सांस फूलना, घरघराहट, खांसी, सीने में जकड़न) और स्पाइरोमेट्री जैसे टेस्ट से चलता है, जिसमें डॉक्टर फेफड़ों के कार्य की जांच करते हैं, और FeNO टेस्ट व पीक फ्लो मीटर जैसे अन्य टेस्ट भी मदद करते हैं, जिससे वायुमार्गों की सूजन और हवा के प्रवाह को मापा जाता है, और सही निदान के लिए डॉक्टर से मिलना ज़रूरी है।  

Q5. अस्थमा कितने दिन तक रहता है?
अस्थमा का दौरा हल्का या गंभीर हो सकता है। अस्थमा के लक्षण कुछ मिनट, कुछ घंटे या कई दिनों तक रह सकते हैं। ज़्यादातर लोग सही इलाज लेने पर ठीक हो जाते हैं, यहां तक कि अस्थमा का गंभीर दौरा भी सही इलाज से ठीक हो सकता है।


Disclaimer (अस्वीकरण)

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी इलाज से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

Bronchitis क्या है? कारण, लक्षण, जांच, इलाज और बचाव

Bronchitis क्या है? (What is Bronchitis in Hindi)

Bronchitis एक श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारी है, जिसमें फेफड़ों तक हवा ले जाने वाली नलियों (Bronchial Tubes) में सूजन आ जाती है। इस कारण खांसी, बलगम बनना और सांस लेने में दिक्कत होती है। Bronchitis मुख्य रूप से फेफड़ों और श्वसन तंत्र को प्रभावित करती है। यह बीमारी काफी आम है और बच्चों, बुजुर्गों तथा धूम्रपान करने वालों में ज्यादा देखी जाती है। Bronchitis दो प्रकार की होती है—Acute और Chronic।


Bronchitis होने के कारण (Causes of Bronchitis in Hindi)

Bronchitis के कारण ज्यादातर संक्रमण और प्रदूषण से जुड़े होते हैं। लंबे समय तक सांस की नलियों में जलन रहने से यह समस्या बढ़ सकती है।

Bronchitis के मुख्य कारण:

  • वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण (Bronchitis के कारण)

  • धूम्रपान और तंबाकू सेवन

  • वायु प्रदूषण और धूल

  • कमजोर इम्यून सिस्टम / बार-बार सर्दी


Bronchitis के लक्षण (Symptoms of Bronchitis in Hindi)

Bronchitis के लक्षण शुरुआत में हल्के होते हैं, लेकिन समय पर इलाज न होने पर गंभीर हो सकते हैं।

आमतौर पर दिखने वाले लक्षण:

  • शुरुआती लक्षण: सूखी खांसी, गले में खराश

  • सामान्य लक्षण: बलगम वाली खांसी, थकान, हल्का बुखार

  • गंभीर अवस्था: सांस फूलना, सीने में दर्द


Bronchitis की जांच कैसे होती है? (Diagnosis of Bronchitis in Hindi)

Bronchitis की जांच डॉक्टर मरीज के लक्षणों और मेडिकल जांच के आधार पर करते हैं, ताकि संक्रमण की गंभीरता समझी जा सके।

जांच के तरीके:


Bronchitis से बचाव (Prevention Tips of Bronchitis in Hindi)

Bronchitis से बचाव के लिए साफ वातावरण और मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली जरूरी है। सही आदतें अपनाकर इस बीमारी से काफी हद तक बचा जा सकता है।

बचाव के उपाय:

  • धूम्रपान से पूरी तरह दूरी

  • प्रदूषण और धूल से बचाव

  • संतुलित आहार और पर्याप्त पानी

  • समय पर सर्दी-खांसी का इलाज


Bronchitis का इलाज (Treatment of Bronchitis in Hindi)

Bronchitis का इलाज इसके प्रकार और गंभीरता पर निर्भर करता है। अधिकतर मामलों में यह सही देखभाल से ठीक हो जाती है।

इलाज के विकल्प:

  • खांसी और सूजन की दवाइयाँ

  • भाप लेना और गर्म तरल पदार्थ

  • लाइफस्टाइल बदलाव

  • गंभीर मामलों में एंटीबायोटिक या थेरेपी

Also Read : Asthma क्या है? कारण, लक्षण, जांच, इलाज और बचाव 


कब डॉक्टर से संपर्क करें? (Consult With Our Doctor)

यदि Bronchitis के लक्षण लंबे समय तक बने रहें या सांस लेने में ज्यादा परेशानी हो, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए।

डॉक्टर से संपर्क करें जब:

  • खांसी 2–3 हफ्तों से ज्यादा रहे

  • सांस फूलना बढ़ जाए

  • घरेलू उपाय असर न करें

📞 हमारे अनुभवी डॉक्टर से आज ही संपर्क करें और सही इलाज पाएं।

Dr. Vipul Bhatt
B.A.M.S. (HAMC), D.N.I. (NIA, Jaipur)
Chief physician-Sandhanama Ayurveda.Dehradun U.K
Ex. Consultant: T. Ayurveda, Changchun, China,
Ex. Consultant : Dongshan ayurveda, Hainan, China

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs of Bronchitis)

Q1. Bronchitis कितने दिनों में ठीक हो जाती है?
Acute Bronchitis आमतौर पर 1–3 हफ्तों में ठीक हो जाती है।

Q2. क्या Bronchitis संक्रामक है?
वायरल Bronchitis फैल सकती है, लेकिन Chronic नहीं।

Q3. Bronchitis में क्या परहेज जरूरी है?
धूम्रपान, ठंडी हवा और प्रदूषण से बचना चाहिए।

Q4. ब्रोंकाइटिस में क्या परहेज करना चाहिए?
अत्यधिक सोडियम और नमक उच्च सोडियम सेवन से जल प्रतिधारण (एडिमा) होता है, जो सांस लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है और क्रोनिक ब्रोंकाइटिस जैसी स्थितियों में श्वसन संबंधी लक्षणों को खराब कर सकता है।

Q5. मुझे कैसे पता चलेगा कि मेरी ब्रोंकाइटिस पुरानी है?
क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस कहलाने के लिए: आपको कम से कम 3 महीने तक खांसी और बलगम रहना चाहिए और यह समस्या कम से कम 2 साल की अवधि में कई बार होनी चाहिए । तपेदिक या फेफड़ों की अन्य बीमारियों जैसे लक्षणों के अन्य कारणों को खारिज किया जाना चाहिए।


Disclaimer (अस्वीकरण)

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी इलाज से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

Cold and Cough क्या है? कारण, लक्षण, जांच, इलाज और बचाव

Cold and Cough क्या है? (What is Cold and Cough in Hindi)

Cold and cough एक आम श्वसन (Respiratory) समस्या है, जो मुख्य रूप से वायरल संक्रमण के कारण होती है। इसमें नाक बहना, छींक आना, गले में खराश और खांसी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। यह बीमारी नाक, गला और श्वसन तंत्र को प्रभावित करती है। Cold and cough बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में अधिक आम है और मौसम बदलने पर तेजी से फैलती है।


Cold and Cough होने के कारण (Causes of Cold and Cough in Hindi)

Cold and cough के कारण ज्यादातर वायरल संक्रमण से जुड़े होते हैं। यह संक्रमण हवा, छींक या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से फैल सकता है। कमजोर इम्यून सिस्टम होने पर इसका खतरा बढ़ जाता है।

Cold and cough के मुख्य कारण:

  • वायरल संक्रमण (Cold and cough के कारण)

  • ठंडी हवा या मौसम में अचानक बदलाव

  • गंदे हाथों से नाक या मुंह छूना

  • कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली / एलर्जी


Cold and Cough के लक्षण (Symptoms of Cold and Cough in Hindi)

Cold and cough के लक्षण हल्के से लेकर गंभीर हो सकते हैं। आमतौर पर यह कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं, लेकिन कभी-कभी परेशानी बढ़ सकती है।

आमतौर पर दिखने वाले लक्षण:

  • शुरुआती लक्षण: छींक, नाक बहना, गले में खराश

  • सामान्य लक्षण: खांसी, हल्का बुखार, सिरदर्द

  • गंभीर अवस्था: सांस लेने में दिक्कत, तेज बुखार


Cold and Cough की जांच कैसे होती है? (Diagnosis of Cold and Cough in Hindi)

अधिकतर मामलों में Cold and cough की पहचान लक्षणों के आधार पर की जाती है। यदि लक्षण लंबे समय तक बने रहें या गंभीर हों, तो डॉक्टर कुछ जांच की सलाह दे सकते हैं।

जांच के तरीके:

  • शारीरिक परीक्षण

  • गले या नाक का स्वैब टेस्ट

  • ब्लड टेस्ट (यदि आवश्यक हो)

  • अन्य जांच, यदि संक्रमण गंभीर हो


Cold and Cough से बचाव (Prevention Tips of Cold and Cough in Hindi)

Cold and cough से बचाव के लिए स्वच्छता और मजबूत इम्यूनिटी बेहद जरूरी है। कुछ आसान उपाय अपनाकर इससे बचा जा सकता है।

बचाव के उपाय:

  • हाथों को बार-बार धोना

  • ठंडी चीजों और ठंडी हवा से बचाव

  • पौष्टिक आहार और पर्याप्त नींद

  • बीमार व्यक्ति से दूरी बनाए रखना


Cold and Cough का इलाज (Treatment of Cold and Cough in Hindi)

Cold and cough का इलाज इसके लक्षणों पर निर्भर करता है। ज्यादातर मामलों में यह घरेलू उपायों और दवाइयों से ठीक हो जाता है।

इलाज के विकल्प:

  • खांसी-ज़ुकाम की दवाइयाँ

  • भाप लेना और गर्म तरल पदार्थ

  • आराम और पर्याप्त पानी

  • गंभीर मामलों में डॉक्टर की दवाइयाँ

Also Read : Kidney Disorder क्या है? कारण, लक्षण, जांच, इलाज और बचाव 


कब डॉक्टर से संपर्क करें? (Consult With Our Doctor)

अगर Cold and cough के लक्षण लंबे समय तक बने रहें या बिगड़ने लगें, तो डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों में सावधानी अधिक जरूरी होती है।

डॉक्टर से संपर्क करें जब:

  • लक्षण 7–10 दिन से ज्यादा रहें

  • तेज बुखार या सांस लेने में दिक्कत हो

  • घरेलू उपाय काम न करें

📞 हमारे अनुभवी डॉक्टर से आज ही संपर्क करें और सही इलाज पाएं।

Dr. Vipul Bhatt
B.A.M.S. (HAMC), D.N.I. (NIA, Jaipur)
Chief physician-Sandhanam Ayurveda.Dehradun U.K
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs of Cold and Cough)

Q1. Cold and cough कितने दिनों में ठीक हो जाता है?
आमतौर पर 5–7 दिनों में ठीक हो जाता है।

Q2. क्या Cold and cough संक्रामक है?
हाँ, यह एक व्यक्ति से दूसरे में फैल सकता है।

Q3. Cold and cough में क्या परहेज करना चाहिए?
ठंडी चीजें, धूम्रपान और ठंडे वातावरण से बचना चाहिए।

Q2. कफ कितने दिन तक रहता है?
बलगम वाली खाँसी बलगम को कफ या थूक भी कहते हैं। तीव्र खांसी आमतौर पर तेज़ी से शुरू होती है और अक्सर सर्दी , फ्लू या साइनस के संक्रमण के कारण होती है। ये आमतौर पर 3 हफ़्ते बाद ठीक हो जाती है। उप-तीव्र खांसी 3 से 8 सप्ताह तक रहती है और अक्सर इससे भी पहले।

Q3. फेफड़ों में कफ जमने के क्या लक्षण हैं?
फेफड़ों में कफ होने के लक्षणों में लगातार खांसी, सांस लेने में तकलीफ, घरघराहट (wheezing), छाती में जकड़न या भारीपन, और बलगम निकलना (जो सफेद, पीला या हरा हो सकता है) शामिल हैं; इसके साथ बुखार, थकान, सीने में दर्द, और मांसपेशियों में दर्द (body aches) भी हो सकते हैं, और गंभीर स्थिति में होंठ या त्वचा नीले पड़ सकते हैं। यह सीओपीडी (COPD), ब्रोंकाइटिस, निमोनिया या अस्थमा जैसी स्थितियों का संकेत हो सकता है, और डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है, खासकर अगर लक्षण गंभीर हों या बने रहें। 


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यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी इलाज से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

Kidney Disorder क्या है? कारण, लक्षण, जांच, इलाज और बचाव

Kidney Disorder क्या है? (What is Kidney Disorder in Hindi)

Kidney disorder एक ऐसी स्थिति है जिसमें किडनी (गुर्दे) ठीक से काम नहीं कर पाते। किडनी का मुख्य काम खून को साफ करना, शरीर से विषैले पदार्थ निकालना और तरल संतुलन बनाए रखना होता है। Kidney disorder के कारण शरीर में गंदे तत्व जमा होने लगते हैं। यह बीमारी बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक किसी को भी हो सकती है और आजकल काफी आम होती जा रही है।


Kidney Disorder होने के कारण (Causes of Kidney Disorder in Hindi)

Kidney disorder के कारण जीवनशैली और मेडिकल समस्याओं से जुड़े हो सकते हैं। लंबे समय तक अनदेखी करने पर यह गंभीर रूप ले सकता है।

Kidney disorder के मुख्य कारण:

  • उच्च रक्तचाप और Diabetes (Kidney disorder के कारण)

  • लंबे समय तक दवाइयों का अधिक सेवन

  • कम पानी पीना और अस्वस्थ आहार

  • अनुवांशिक या अन्य किडनी संबंधी बीमारियाँ


Kidney Disorder के लक्षण (Symptoms of Kidney Disorder in Hindi)

Kidney disorder के लक्षण शुरुआत में हल्के होते हैं, इसलिए अक्सर नजरअंदाज हो जाते हैं। समय के साथ ये लक्षण गंभीर हो सकते हैं।

आमतौर पर दिखने वाले लक्षण:

  • शुरुआती लक्षण: थकान, पेशाब में बदलाव

  • सामान्य लक्षण: सूजन, भूख कम लगना

  • गंभीर अवस्था: सांस फूलना, पेशाब में खून


Kidney Disorder की जांच कैसे होती है? (Diagnosis of Kidney Disorder in Hindi)

Kidney disorder की सही पहचान के लिए डॉक्टर कई तरह की जांच करते हैं ताकि बीमारी की स्थिति और गंभीरता समझी जा सके।

जांच के तरीके:

  • शारीरिक परीक्षण

  • ब्लड और यूरिन टेस्ट

  • अल्ट्रासाउंड, CT स्कैन

  • अन्य आवश्यक मेडिकल जांच


Kidney Disorder से बचाव (Prevention Tips of Kidney Disorder in Hindi)

Kidney disorder से बचाव के लिए स्वस्थ जीवनशैली सबसे जरूरी है। समय पर सावधानी बरतने से किडनी को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है।

बचाव के उपाय:

  • पर्याप्त मात्रा में पानी पीना

  • संतुलित और कम नमक वाला आहार

  • नियमित व्यायाम

  • समय-समय पर किडनी जांच


Kidney Disorder का इलाज (Treatment of Kidney Disorder in Hindi)

Kidney disorder का इलाज बीमारी की अवस्था पर निर्भर करता है। शुरुआती चरण में दवाइयों और लाइफस्टाइल सुधार से नियंत्रण संभव है।

इलाज के विकल्प:

  • दवाइयों द्वारा इलाज

  • खान-पान और जीवनशैली में बदलाव

  • डायलिसिस या सर्जरी (गंभीर मामलों में)

Also Read : Arthritis क्या है? कारण, लक्षण, जांच, इलाज और बचाव 


कब डॉक्टर से संपर्क करें? (Consult With Our Doctor)

अगर Kidney disorder के लक्षण लंबे समय तक बने रहें या तेजी से बढ़ें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज से किडनी फेल होने के खतरे को कम किया जा सकता है।

डॉक्टर से संपर्क करें जब:

  • लक्षण लगातार बने रहें

  • सूजन या कमजोरी बढ़ती जाए

  • घरेलू उपाय असर न करें

📞 हमारे अनुभवी डॉक्टर से आज ही संपर्क करें और सही इलाज पाएं।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs of Kidney Disorder)

Q1. Kidney disorder क्या पूरी तरह ठीक हो सकता है?
यह बीमारी पूरी तरह ठीक होना कठिन हो सकता है, लेकिन नियंत्रित की जा सकती है।

Q2. Kidney disorder की शुरुआती पहचान कैसे करें?
यूरिन टेस्ट और ब्लड टेस्ट से शुरुआती पहचान संभव है।

Q3. Kidney disorder में क्या परहेज करना चाहिए?
ज्यादा नमक, शराब और बिना सलाह दवाइयों से बचना चाहिए।

Q4. किडनी के दो सबसे आम रोग कौन से हैं?
गुर्दे की सबसे आम बीमारी क्रॉनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) है। अन्य बीमारियों में एक्यूट किडनी इंजरी, पथरी, संक्रमण, सिस्ट और कैंसर शामिल हैं। गुर्दे शरीर से अपशिष्ट पदार्थों और अतिरिक्त तरल पदार्थ को निकालने के लिए रक्त को छानने जैसे आवश्यक कार्य करते हैं।

Q5. आपको कैसे पता चलेगा कि आपकी किडनी ठीक है?
किडनी की बीमारी गंभीर अवस्था में पहुँचने तक आपको शायद पता ही न चले। स्वास्थ्य पेशेवर रक्त और मूत्र परीक्षणों के माध्यम से किडनी की बीमारी का पता लगा सकते हैं। इन परीक्षणों में रक्त में अपशिष्ट पदार्थों की उच्च मात्रा या मूत्र में प्रोटीन या रक्त की थोड़ी मात्रा जैसी असामान्य चीजों की जाँच की जाती है।


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Arthritis क्या है? कारण, लक्षण, जांच, इलाज और बचाव

Arthritis क्या है? (What is Arthritis in Hindi)

Arthritis एक ऐसी बीमारी है जिसमें जोड़ों (Joints) में सूजन, दर्द और जकड़न हो जाती है। यह बीमारी घुटनों, हाथों, कंधों, कमर और उंगलियों जैसे जोड़ों को प्रभावित करती है। Arthritis किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन यह बुजुर्गों में अधिक आम है। समय पर इलाज न होने पर यह रोजमर्रा की गतिविधियों को मुश्किल बना सकता है। Arthritis के कई प्रकार होते हैं, जैसे Osteoarthritis और Rheumatoid Arthritis।


Arthritis होने के कारण (Causes of Arthritis In Hindi)

Arthritis के कारण जोड़ों में घिसाव, सूजन या इम्यून सिस्टम की गड़बड़ी से जुड़े होते हैं। उम्र बढ़ने के साथ इसका खतरा बढ़ जाता है। गलत जीवनशैली, मोटापा और पुरानी चोटें भी Arthritis के कारण बन सकती हैं।

Arthritis के मुख्य कारण:

  • जोड़ों का घिसना (Arthritis के कारण – Osteoarthritis)

  • बढ़ती उम्र

  • मोटापा और कम शारीरिक गतिविधि

  • अनुवांशिक / ऑटोइम्यून कारण (Rheumatoid Arthritis)


Arthritis के लक्षण (Symptoms of Arthritis In Hindi)

Arthritis के लक्षण धीरे-धीरे या अचानक शुरू हो सकते हैं। शुरुआत में हल्का दर्द होता है, जो समय के साथ बढ़ सकता है। सूजन और जकड़न के कारण जोड़ों को हिलाना मुश्किल हो जाता है।

आमतौर पर दिखने वाले लक्षण:

  • शुरुआती लक्षण: हल्का दर्द, सुबह जकड़न

  • सामान्य लक्षण: सूजन, चलने-फिरने में परेशानी

  • गंभीर अवस्था: तेज दर्द, जोड़ों का आकार बदलना


Arthritis की जांच कैसे होती है? (Diagnosis of Arthritis In Hindi)

Arthritis की जांच डॉक्टर मरीज के लक्षण और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर करते हैं। सही प्रकार जानने के लिए कुछ टेस्ट जरूरी होते हैं, जिससे सटीक इलाज संभव हो सके।

जांच के तरीके:

  • शारीरिक परीक्षण

  • लैब टेस्ट (ब्लड टेस्ट, ESR, CRP)

  • एक्स-रे, MRI या CT स्कैन

  • अन्य आवश्यक जांच

Also Read : Insomnia क्या है? कारण, लक्षण, जांच, इलाज और बचाव


Arthritis से बचाव (Prevention of Arthritis Tips In Hindi)

Arthritis से बचाव पूरी तरह संभव नहीं, लेकिन सही आदतों से इसका खतरा कम किया जा सकता है। स्वस्थ जीवनशैली जोड़ों को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखती है।

बचाव के उपाय:

  • संतुलित और पोषक आहार

  • नियमित हल्का व्यायाम और योग

  • वजन नियंत्रित रखना

  • समय-समय पर स्वास्थ्य जांच


Arthritis का इलाज (Treatment of Arthritis In Hindi)

Arthritis का इलाज उसकी गंभीरता और प्रकार पर निर्भर करता है। सही इलाज से दर्द और सूजन को नियंत्रित किया जा सकता है और जीवन की गुणवत्ता बेहतर होती है।

इलाज के विकल्प:

  • दर्द और सूजन कम करने की दवाइयाँ

  • लाइफस्टाइल बदलाव और फिजियोथेरेपी

  • सर्जरी (गंभीर मामलों में)


कब डॉक्टर से संपर्क करें? (Consult With Our Doctor)

यदि Arthritis के लक्षण लंबे समय तक बने रहें या दर्द बढ़ता जाए, तो डॉक्टर से तुरंत सलाह लेना जरूरी है। समय पर इलाज से जोड़ों को स्थायी नुकसान से बचाया जा सकता है।

डॉक्टर से संपर्क करें जब:

  • लक्षण कई हफ्तों तक रहें

  • दर्द या सूजन बढ़ती जाए

  • घरेलू उपाय असर न करें

📞 हमारे अनुभवी डॉक्टर से आज ही संपर्क करें और सही इलाज पाएं।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Q1. Arthritis क्या पूरी तरह ठीक हो सकता है?
Arthritis पूरी तरह ठीक नहीं होता, लेकिन सही इलाज से नियंत्रित किया जा सकता है।

Q2. Arthritis किस उम्र में होता है?
यह किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन बुजुर्गों में ज्यादा आम है।

Q3. Arthritis में कौन-सा व्यायाम सही है?
हल्का योग, स्ट्रेचिंग और डॉक्टर द्वारा सुझाया गया व्यायाम बेहतर रहता है।

Q4. क्या arthritis पूरी तरह ठीक हो सकता है?
आमतौर पर, गठिया (Arthritis) पूरी तरह ठीक नहीं होता, खासकर एक बार जोड़ों को नुकसान होने के बाद; हालाँकि, सही इलाज, दवाइयों, जीवनशैली में बदलाव (स्वस्थ आहार, व्यायाम) और डॉक्टर की देखरेख से इसके लक्षणों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है और सामान्य जीवन जिया जा सकता है, देरी से स्थिति बिगड़ सकती है, इसलिए समय पर इलाज महत्वपूर्ण है.  

Q5. Arthritis ke लिए कौन सा टेस्ट होता है?
रक्त परीक्षण, मूत्र परीक्षण, जोड़ों के द्रव परीक्षण, बायोप्सी और एक्स-रे ऐसे उपयोगी उपकरण हैं जिन पर आपका डॉक्टर आपके गठिया के निदान और उपचार में मदद के लिए निर्भर करता है।


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Insomnia क्या है? कारण, लक्षण, जांच, इलाज और बचाव

Insomnia क्या है? (What is Insomnia in Hindi)

Insomnia एक नींद से जुड़ी बीमारी है, जिसमें व्यक्ति को सोने में कठिनाई होती है, नींद बार-बार टूटती है या पर्याप्त नींद नहीं आती। यह समस्या शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित करती है। Insomnia मुख्य रूप से मस्तिष्क और नर्वस सिस्टम से जुड़ी होती है और आज के समय में तनावपूर्ण जीवनशैली के कारण यह काफी आम हो गई है।
शोध के अनुसार, शहरी आबादी में लगभग 30–40% लोग कभी न कभी Insomnia से प्रभावित होते हैं।


Insomnia होने के कारण (Causes of Insomnia in hindi)

Insomnia के कारण व्यक्ति की मानसिक स्थिति, जीवनशैली और कुछ मेडिकल समस्याओं से जुड़े हो सकते हैं। लंबे समय तक तनाव, चिंता या गलत दिनचर्या नींद के प्राकृतिक चक्र को बिगाड़ देती है, जिससे Insomnia की समस्या पैदा होती है।

Insomnia के मुख्य कारण:

  • मानसिक तनाव और चिंता (Insomnia के कारणों में प्रमुख)

  • ज्यादा मोबाइल/स्क्रीन टाइम

  • अनियमित सोने-जागने की आदत

  • कैफीन, शराब या धूम्रपान

  • अवसाद, हार्मोनल असंतुलन, थायरॉयड जैसी मेडिकल समस्याएं


Insomnia के लक्षण (Symptoms of Insomnia in hindi)

Insomnia के लक्षण धीरे-धीरे उभरते हैं और समय के साथ गंभीर हो सकते हैं। पर्याप्त नींद न मिलने से व्यक्ति दिनभर थकान, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता की कमी महसूस करता है।

Insomnia के लक्षण:

  • शुरुआती लक्षण: देर से नींद आना, नींद का बार-बार टूटना

  • सामान्य लक्षण: दिन में थकान, सिरदर्द, चिड़चिड़ापन

  • गंभीर लक्षण: याददाश्त कमजोर होना, अवसाद, काम की क्षमता कम होना


Insomnia की जांच कैसे होती है?(Diagnosis of Insomnia in hindi)

Insomnia की जांच मुख्य रूप से मरीज की नींद की आदतों और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर की जाती है। कुछ मामलों में नींद से जुड़े विशेष टेस्ट भी कराए जाते हैं।

जांच के तरीके:

  • शारीरिक और मानसिक परीक्षण

  • स्लीप पैटर्न का आकलन

  • ब्लड टेस्ट (यदि कारण मेडिकल हो)

  • स्लीप स्टडी (Polysomnography), यदि आवश्यक हो


Insomnia से बचाव (Prevention Tips of Insomnia in hindi)

Insomnia से बचाव के लिए सही जीवनशैली और अच्छी स्लीप हाइजीन बहुत जरूरी है। रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतें नींद की गुणवत्ता को बेहतर बना सकती हैं।

Insomnia से बचाव के उपाय:

  • नियमित सोने-जागने का समय तय करें

  • सोने से पहले मोबाइल और स्क्रीन से दूरी

  • हल्का भोजन और कैफीन से परहेज

  • योग, ध्यान और रिलैक्सेशन तकनीक अपनाएं

  • समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराएं


Insomnia का इलाज (Treatment of Insomnia in hindi)

Insomnia का इलाज इसकी गंभीरता और कारण पर निर्भर करता है। अधिकतर मामलों में जीवनशैली सुधार से ही स्थिति बेहतर हो जाती है।

इलाज के विकल्प:

  • नींद बढ़ाने वाली दवाइयाँ (डॉक्टर की सलाह से)

  • लाइफस्टाइल और स्लीप रूटीन में बदलाव

  • काउंसलिंग या CBT-I थेरेपी

  • गंभीर मामलों में विशेष स्लीप ट्रीटमेंट

Also Read : Best Panchkarma Center in Dehradun | Sandhanam Ayurveda


कब डॉक्टर से संपर्क करें? (Consult With Our Doctor)

यदि Insomnia की समस्या लंबे समय तक बनी रहे और आपकी दिनचर्या प्रभावित करने लगे, तो डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। समय पर इलाज से गंभीर मानसिक और शारीरिक समस्याओं से बचा जा सकता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें यदि:

  • Insomnia के लक्षण 2–3 हफ्तों से ज्यादा रहें

  • थकान, अवसाद या चिड़चिड़ापन बढ़ता जाए

  • घरेलू उपाय असर न करें

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Q1. Insomnia क्या हमेशा के लिए ठीक हो सकता है?
हाँ, सही इलाज और जीवनशैली बदलाव से Insomnia पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।

Q2. Insomnia के लिए घरेलू उपाय कारगर हैं?
हल्के मामलों में योग, ध्यान और सही रूटीन से काफी फायदा मिलता है।

Q3. Insomnia में दवाइयाँ सुरक्षित हैं?
डॉक्टर की सलाह से ली गई दवाइयाँ सुरक्षित होती हैं।

Q4. इनसोम्निया बीमारी कैसे होती है?
इनसोम्निया (अनिद्रा) तनाव, खराब नींद की आदतों (अनियमित समय, स्क्रीन टाइम), कैफीन/शराब, कुछ दवाएं, और शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं जैसे डिप्रेशन या दर्द के कारण होती है, जिससे सोना या सोए रहना मुश्किल हो जाता है, और यह अक्सर जीवनशैली, वातावरण और अंतर्निहित स्थितियों का मिश्रण होता

Q5. मुझे कैसे पता चलेगा कि मुझे हाइपरसोमनिया है?
आपको हाइपरसोमनिया (अत्यधिक नींद) है या नहीं, यह जानने के लिए देखें कि क्या आपको पूरी रात की नींद के बाद भी दिन में लगातार नींद आती है, सुबह उठने में कठिनाई होती है, और जागने पर भी सुस्ती, भ्रम या ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होती है, भले ही आप रात में 10-11 घंटे से ज़्यादा सो रहे हों;ये लक्षण हाइपरसोमनिया के मुख्य संकेत हैं, और सही निदान के लिए डॉक्टर से मिलना ज़रूरी है


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यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी प्रकार के इलाज या दवा लेने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें