Cervical spondylitis क्या है? (What is Cervical Spondylitis in Hindi)

Cervical spondylitis गर्दन की रीढ़ (Cervical Spine) से जुड़ी एक समस्या है, जिसमें उम्र बढ़ने या गलत जीवनशैली के कारण गर्दन की हड्डियों और डिस्क में घिसाव (Wear and Tear) होने लगता है। इससे गर्दन में दर्द, अकड़न और कभी-कभी हाथों में झनझनाहट हो सकती है।

यह बीमारी मुख्य रूप से गर्दन की रीढ़ (Neck / Cervical Spine) को प्रभावित करती है। आज के समय में यह काफी आम हो गई है, खासकर कंप्यूटर पर लंबे समय तक काम करने वाले और 30 वर्ष से ऊपर के लोगों में।


Cervical spondylitis होने के कारण (Causes of Cervical Spondylitis in Hindi)

Cervical spondylitis का मुख्य कारण गर्दन की हड्डियों का धीरे-धीरे कमजोर होना है। गलत बैठने की आदत, मोबाइल या लैपटॉप का ज्यादा उपयोग और उम्र बढ़ना इस समस्या को बढ़ा सकता है।

Cervical spondylitis के मुख्य कारण निम्नलिखित हो सकते हैं:

  • हड्डियों का घिसाव (Degenerative Changes)

  • गलत पोश्चर (Wrong Posture)

  • लंबे समय तक मोबाइल/कंप्यूटर का उपयोग

  • जीवनशैली से जुड़े कारण – शारीरिक गतिविधि की कमी

  • अनुवांशिक या मेडिकल कारण – पहले से रीढ़ की समस्या


Cervical spondylitis के लक्षण (Symptoms of Cervical Spondylitis in Hindi)

Cervical spondylitis के लक्षण धीरे-धीरे शुरू होते हैं और समय के साथ बढ़ सकते हैं। शुरुआत में हल्का दर्द होता है, जिसे लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं।

इस बीमारी में आमतौर पर ये लक्षण दिखाई देते हैं:

🔹 शुरुआती लक्षण

  • गर्दन में हल्का दर्द

  • गर्दन घुमाने में परेशानी

🔹 सामान्य लक्षण

  • गर्दन और कंधों में अकड़न

  • सिरदर्द

  • हाथों में झनझनाहट या सुन्नपन

🔹 गंभीर अवस्था के लक्षण

  • हाथों में कमजोरी

  • संतुलन बनाने में परेशानी


Cervical spondylitis की जांच कैसे होती है? (Diagnosis of Cervical Spondylitis in Hindi)

Cervical spondylitis की जांच लक्षणों और इमेजिंग टेस्ट के आधार पर की जाती है। डॉक्टर गर्दन की मूवमेंट और दर्द की गंभीरता को देखकर जांच का निर्णय लेते हैं।

डॉक्टर निम्न जांच कर सकते हैं:

  • शारीरिक परीक्षण (Physical Examination)

  • एक्स-रे (X-Ray)

  • MRI या CT Scan

  • नसों की जांच (यदि सुन्नपन हो)


Cervical spondylitis से बचाव (Prevention Tips of Cervical Spondylitis in Hindi)

Cervical spondylitis से बचाव के लिए सही पोश्चर और एक्टिव लाइफस्टाइल बहुत जरूरी है। रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतें इस बीमारी से बचाने में मदद कर सकती हैं।

Cervical spondylitis से बचाव के उपाय:

  • सही बैठने और सोने की आदत अपनाएं

  • नियमित गर्दन के व्यायाम करें

  • मोबाइल और लैपटॉप का सीमित उपयोग

  • वजन संतुलित रखें

  • समय-समय पर हेल्थ चेकअप

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Cervical spondylitis का इलाज (Treatment of Cervical Spondylitis in Hindi)

Cervical spondylitis का इलाज इसकी गंभीरता पर निर्भर करता है। अधिकतर मामलों में बिना सर्जरी के ही आराम मिल सकता है।

Cervical spondylitis का इलाज शामिल हो सकता है:

  • दवाइयों द्वारा इलाज – दर्द और सूजन कम करने के लिए

  • फिजियोथेरेपी और एक्सरसाइज

  • लाइफस्टाइल बदलाव – सही पोश्चर

  • सर्जरी / थेरेपी (बहुत गंभीर मामलों में)


कब डॉक्टर से संपर्क करें? (Consult With Our Doctor)

अगर गर्दन का दर्द लंबे समय तक बना रहे या हाथों में सुन्नपन बढ़ता जाए, तो डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। समय पर इलाज से समस्या गंभीर होने से बच सकती है।

तुरंत डॉक्टर से सलाह लें यदि:

  • दर्द कई हफ्तों तक बना रहे

  • हाथों में कमजोरी महसूस हो

  • सिरदर्द या चक्कर बढ़ जाए

  • घरेलू उपाय असर न करें

📞 हमारे अनुभवी डॉक्टर से आज ही संपर्क करें और सही इलाज पाएं।

Dr. Vipul Bhatt
B.A.M.S. (HAMC), D.N.I. (NIA, Jaipur)
Chief physician-Sandhanama Ayurveda.Dehradun U.K
Ex. Consultant: T. Ayurveda, Changchun, China,
Ex. Consultant : Dongshan ayurveda, Hainan, China

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Cervical spondylitis से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. क्या Cervical spondylitis पूरी तरह ठीक हो सकती है?
यह पूरी तरह खत्म नहीं होती, लेकिन सही इलाज से कंट्रोल में रहती है।

Q2. क्या यह बीमारी युवाओं में भी हो सकती है?
हां, गलत पोश्चर के कारण युवाओं में भी हो रही है।

Q3. Cervical spondylitis में तकिया कैसा होना चाहिए?
न ज्यादा ऊंचा, न ज्यादा पतला – गर्दन को सपोर्ट देने वाला तकिया बेहतर होता है।

Q4. क्या एक्सरसाइज से आराम मिलता है?
हां, सही एक्सरसाइज और फिजियोथेरेपी से काफी फायदा होता है।

Q5. क्या Cervical spondylitis खतरनाक है?
हाँ, सर्वाइकल (गर्दन) की समस्या खतरनाक हो सकती है, खासकर अगर इसे नज़रअंदाज़ किया जाए; यह सामान्य दर्द से लेकर तंत्रिका क्षति, रीढ़ की हड्डी पर दबाव, और गंभीर मामलों में हाथ-पैरों में कमजोरी या लकवा (पक्षाघात) तक का कारण बन सकती है


Disclaimer (अस्वीकरण)

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी दवा या इलाज से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

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