Diabetes Mellitus क्या है? (What is Diabetes Mellitus in Hindi)
Diabetes Mellitus एक चयापचय (Metabolic) रोग है, जिसमें शरीर में रक्त शर्करा (Blood Sugar) का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है। यह समस्या तब होती है जब शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बनाता या इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पाता।
Diabetes Mellitus मुख्य रूप से अग्न्याशय (Pancreas) और पूरे शरीर की कोशिकाओं को प्रभावित करता है। यह एक बहुत आम बीमारी है और भारत में करोड़ों लोग Diabetes Mellitus से पीड़ित हैं।
Diabetes Mellitus होने के कारण (Causes of Diabetes Mellitus in Hindi)
Diabetes Mellitus के कारण शरीर में इंसुलिन की कमी या उसका सही तरह से काम न करना होता है। गलत जीवनशैली और अनुवांशिक कारण इस बीमारी के खतरे को बढ़ा देते हैं। लंबे समय तक अनियंत्रित रहने पर यह गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती है।
Diabetes Mellitus के मुख्य कारण:
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इंसुलिन का कम बनना (Diabetes Mellitus के कारण)
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मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता
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अधिक मीठा और जंक फूड सेवन
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पारिवारिक / अनुवांशिक इतिहास
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तनाव और हार्मोनल असंतुलन
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गर्भावस्था में डायबिटीज (Gestational Diabetes)
Diabetes Mellitus के लक्षण (Symptoms of Diabetes Mellitus in Hindi)
Diabetes Mellitus के लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं। कई बार शुरुआत में लक्षण हल्के होते हैं, जिससे बीमारी पहचान में नहीं आती। समय के साथ लक्षण गंभीर हो सकते हैं।
Diabetes Mellitus के लक्षण आमतौर पर:
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शुरुआती लक्षण: बार-बार प्यास लगना, थकान
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सामान्य लक्षण: बार-बार पेशाब आना, वजन घटना
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गंभीर लक्षण: नजर धुंधली होना, घाव देर से भरना, हाथ-पैर सुन्न होना
Diabetes Mellitus की जांच कैसे होती है? (Diagnosis of Diabetes Mellitus in Hindi)
Diabetes Mellitus की जांच ब्लड शुगर टेस्ट द्वारा की जाती है। समय पर जांच से बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है और जटिलताओं से बचाव संभव है।
डॉक्टर निम्न जांच कर सकते हैं:
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फास्टिंग ब्लड शुगर टेस्ट
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पोस्ट प्रांडियल ब्लड शुगर टेस्ट
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HbA1c टेस्ट
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यूरिन टेस्ट
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अन्य आवश्यक मेडिकल जांच
Diabetes Mellitus से बचाव (Prevention Tips of Diabetes Mellitus in Hindi)
Diabetes Mellitus से बचाव के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी है। सही खान-पान और नियमित गतिविधि से इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
Diabetes Mellitus से बचाव के उपाय:
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संतुलित और कम शुगर वाला आहार
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नियमित व्यायाम और वजन नियंत्रण
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तनाव कम करना
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धूम्रपान और शराब से दूरी
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समय-समय पर ब्लड शुगर जांच
Diabetes Mellitus का इलाज (Treatment of Diabetes Mellitus in Hindi)
Diabetes Mellitus का इलाज मरीज की स्थिति और डायबिटीज के प्रकार पर निर्भर करता है। सही इलाज से ब्लड शुगर को नियंत्रित रखा जा सकता है।
Diabetes Mellitus का इलाज:
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दवाइयों द्वारा इलाज
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इंसुलिन थेरेपी (यदि आवश्यक हो)
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लाइफस्टाइल बदलाव
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डाइट कंट्रोल और नियमित मॉनिटरिंग
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कब डॉक्टर से संपर्क करें? (Consult With Our Doctor)
यदि आपको Diabetes Mellitus के लक्षण दिखाई दें या ब्लड शुगर लगातार बढ़ी हुई आए, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज गंभीर जटिलताओं से बचाता है।
तुरंत डॉक्टर से सलाह लें यदि:
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बार-बार प्यास और पेशाब आए
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वजन तेजी से घटे
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थकान या कमजोरी बनी रहे
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घरेलू उपाय असर न करें
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Dr. Vipul Bhatt
B.A.M.S. (HAMC), D.N.I. (NIA, Jaipur)
Chief physician-Sandhanama Ayurveda.Dehradun U.K
Ex. Consultant: T. Ayurveda, Changchun, China,
Ex. Consultant : Dongshan ayurveda, Hainan, China
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs of Diabetes Mellitus)
Q1. Diabetes Mellitus क्या पूरी तरह ठीक हो सकता है?
नहीं, लेकिन सही इलाज और जीवनशैली से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
Q2. क्या Diabetes केवल मीठा खाने से होती है?
नहीं, इसके कई कारण होते हैं जैसे मोटापा, अनुवांशिकता और जीवनशैली।
Q3. क्या युवा लोगों को भी Diabetes Mellitus हो सकती है?
हाँ, आजकल गलत जीवनशैली के कारण युवाओं में भी यह बीमारी बढ़ रही है।
Q4. डायबिटीज मेलिटस क्या नहीं खाना चाहिए?
सफेद ब्रेड, पास्ता और मीठे अनाज आपके शरीर में ब्लड शुगर की मात्रा को बढ़ाते हैं। मीठे पेय पदार्थ: कुछ लोगों को सोडा, फलों के रस और एनर्जी ड्रिंक पीने की आदत होती है। लेकिन यह ब्लड शुगर के साथ-साथ एम्पटी कैलोरी को भी बढ़ाता है।
Q5. डायबिटीज सबसे पहले क्या नुकसान पहुंचाती है?
हृदय संबंधी जटिलताएं: टाइप 1 मधुमेह वाले व्यक्तियों में हृदय रोग विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है, जिसमें कोरोनरी धमनी रोग, दिल का दौरा और स्ट्रोक शामिल हैं। नेफ्रोपैथी (गुर्दे की क्षति): क्रोनिक हाई ब्लड शुगर समय के साथ गुर्दे को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे डायबिटिक नेफ्रोपैथी हो सकती है।
Disclaimer (अस्वीकरण)
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी जांच या इलाज से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।




