Heart Disease, CAD क्या है? (What is Heart Disease / CAD in Hindi)
Heart Disease एक सामान्य शब्द है, जिसमें दिल से जुड़ी कई बीमारियां शामिल होती हैं। इनमें सबसे आम है CAD (Coronary Artery Disease)। CAD वह स्थिति है जिसमें दिल की धमनियों में वसा (प्लाक) जम जाती है, जिससे रक्त प्रवाह कम हो जाता है।
Heart disease, CAD मुख्य रूप से हृदय की धमनियों को प्रभावित करती है और आज यह दुनिया भर में मौत के प्रमुख कारणों में से एक है।
Heart Disease, CAD होने के कारण (Causes of Heart Disease, CAD in Hindi)
Heart disease और CAD धीरे-धीरे विकसित होने वाली बीमारियां हैं। गलत जीवनशैली और कुछ मेडिकल स्थितियां इनका जोखिम बढ़ा देती हैं। लंबे समय तक अनदेखा करने पर यह हार्ट अटैक का कारण बन सकती हैं।
Heart disease, CAD के मुख्य कारण:
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धमनियों में चर्बी जमना (Heart disease के कारण)
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उच्च रक्तचाप (Hypertension)
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उच्च कोलेस्ट्रॉल
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धूम्रपान और शराब सेवन
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मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता
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अनुवांशिक / पारिवारिक हृदय रोग
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मधुमेह (Diabetes)
Heart Disease, CAD के लक्षण (Symptoms of Heart Disease, CAD in Hindi)
Heart disease, CAD के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। शुरुआत में हल्के संकेत दिखाई देते हैं, लेकिन गंभीर अवस्था में स्थिति जानलेवा हो सकती है।
Heart disease, CAD के लक्षण आमतौर पर:
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शुरुआती लक्षण: थकान, हल्का सीने में भारीपन
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सामान्य लक्षण: सीने में दर्द, सांस फूलना, पसीना आना
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गंभीर लक्षण: तेज सीने का दर्द, बाएं हाथ या जबड़े में दर्द, बेहोशी
Heart Disease, CAD की जांच कैसे होती है? (Diagnosis of Heart Disease, CAD in Hindi)
Heart disease और CAD की समय पर जांच बेहद जरूरी है। सही जांच से बीमारी की गंभीरता का पता लगाया जाता है और इलाज की योजना बनती है।
डॉक्टर निम्न जांच कर सकते हैं:
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शारीरिक परीक्षण और BP जांच
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ECG (इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम)
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ECHO (2D Echo)
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ब्लड टेस्ट (कोलेस्ट्रॉल, शुगर)
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TMT, CT Angiography या Coronary Angiography
Heart Disease, CAD से बचाव (Prevention Tips of Heart Disease, CAD in Hindi)
Heart disease, CAD से बचाव संभव है यदि समय रहते सही कदम उठाए जाएं। स्वस्थ जीवनशैली सबसे बड़ा बचाव है।
Heart disease, CAD से बचाव के उपाय:
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कम वसा और कम नमक वाला आहार
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नियमित व्यायाम और योग
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धूम्रपान व शराब से दूरी
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वजन और BP नियंत्रण
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नियमित हार्ट चेक-अप
Heart Disease, CAD का इलाज (Treatment of Heart Disease, CAD in Hindi)
Heart disease, CAD का इलाज इसकी गंभीरता पर निर्भर करता है। शुरुआती अवस्था में दवाइयों से नियंत्रण संभव है, जबकि गंभीर मामलों में सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।
Heart disease, CAD का इलाज:
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दवाइयों द्वारा इलाज (ब्लड थिनर, कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल)
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लाइफस्टाइल बदलाव
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बायपास सर्जरी (यदि आवश्यक हो)
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कब डॉक्टर से संपर्क करें? (Consult With Our Doctor)
यदि आपको Heart disease या CAD के लक्षण महसूस हों, तो देर न करें। समय पर इलाज जान बचा सकता है।
तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें यदि:
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सीने में बार-बार दर्द हो
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सांस लेने में परेशानी बढ़े
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थकान या चक्कर लगातार बने रहें
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पारिवारिक इतिहास मौजूद हो
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Dr. Vipul Bhatt
B.A.M.S. (HAMC), D.N.I. (NIA, Jaipur)
Chief physician-Sandhanama Ayurveda.Dehradun U.K
Ex. Consultant: T. Ayurveda, Changchun, China,
Ex. Consultant : Dongshan ayurveda, Hainan, China
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs of Heart Disease, CAD)
Q1. CAD और हार्ट अटैक में क्या अंतर है?
CAD धमनियों की बीमारी है, जबकि हार्ट अटैक इसका गंभीर परिणाम हो सकता है।
Q2. क्या Heart disease पूरी तरह ठीक हो सकती है?
पूरी तरह नहीं, लेकिन सही इलाज से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
Q3. क्या युवाओं को भी CAD हो सकती है?
हाँ, गलत जीवनशैली के कारण युवाओं में भी CAD के मामले बढ़ रहे हैं।
Q2. हृदय रोग के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
हार्ट डिजीज के शुरुआती लक्षणों में सीने में दर्द या बेचैनी, सांस फूलना, चक्कर आना, अचानक थकान, पसीना आना, और हाथ, गर्दन, जबड़े या पीठ में दर्द शामिल हैं; मतली, उल्टी या पेट खराब होना भी संकेत हो सकते हैं, खासकर महिलाओं में, और इन्हें नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए क्योंकि ये हृदय संबंधी समस्याओं के सूक्ष्म संकेत हो सकते हैं, जिसके लिए डॉक्टर से तुरंत सलाह लेना ज़रूरी है।
Q3. कैसे पता करें कि दिल कमजोर है?
कमजोर दिल के लक्षणों में थकान, सांस फूलना, सीने में दर्द या भारीपन, चक्कर आना, पैरों में सूजन, तेज या अनियमित धड़कन, खांसी (खासकर रात में), मतली, और रात में बार-बार पेशाब आना शामिल हैं, जो खराब रक्त संचार और शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन की कमी के कारण होते हैं; इनमें से कोई भी लक्षण महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाना महत्वपूर्ण है
Disclaimer (अस्वीकरण)
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी जांच या इलाज से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।




